बचपन की कुछ बातें याद हैं मुझे, याद है मेरी माँ का वो आशाओं से भरा चेहरा सपनों से भरी वो आँखें जिससे उन्होंने कितनी उम्मीदों को पाला था रातों को जाग - जागकर । माँ का वो शांत सा चेहरा याद है मुझे मेरे लिए देर तक माँ का खाने पर इंतज़ार करना और अपने हिस्से की मिठाई मुझे दे देना । मेरे लिए मंदिरो में जाकर देवी - देवताओं से मन्नतें मांगना लेकिन मेरी माँ शायद यह नहीं जानती कि इस युग में जहाँ हर चीज़ दौलत की तराज़ू पर तौली जाती है बड़े बड़े चढ़ाओ वालो की मन्नतें पूरी होती है वहां तेरी ये पवित्र मन्नतें किसी भारी चढ़ावे के नीचे दबकर दम तोड़ देगी।
bhai waah......
ReplyDeleteधन्यवाद
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