बचपन की कुछ बातें याद हैं मुझे, याद है मेरी माँ का वो आशाओं से भरा चेहरा सपनों से भरी वो आँखें जिससे उन्होंने कितनी उम्मीदों को पाला था रातों को जाग - जागकर । माँ का वो शांत सा चेहरा याद है मुझे मेरे लिए देर तक माँ का खाने पर इंतज़ार करना और अपने हिस्से की मिठाई मुझे दे देना । मेरे लिए मंदिरो में जाकर देवी - देवताओं से मन्नतें मांगना लेकिन मेरी माँ शायद यह नहीं जानती कि इस युग में जहाँ हर चीज़ दौलत की तराज़ू पर तौली जाती है बड़े बड़े चढ़ाओ वालो की मन्नतें पूरी होती है वहां तेरी ये पवित्र मन्नतें किसी भारी चढ़ावे के नीचे दबकर दम तोड़ देगी।
कुछ लोग ऐसे है जो सफर बदल देते है, या फिर कुछ लोग हमसफर बदल लेते है, कुछ लोग नज़र भी बदल लेते हैं, तो कुछ लोग शहर भी बदल लेते हैं, नही हार मानते किसी किस्मत के आगे, हम वो है जो मुक्कदर बदल लेते है।
मोबी पिक्स 2017 पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के दूसरे सेमेस्टर के छात्रों एवं समस्त गुरुजन और स्टाफ द्वारा मोबीपिक्स कार्यक्रम 13 अप्रैल को आयोजित हुआ | सभी लोगो ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, इस कार्यक्रम में मोबाइल से ली गयी फोटो की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया | सारे छात्रों ने मोबाइल से फोटो खींच कर प्रदर्शनी में लगायी | मुख्य अतिथि के रूप में दूरदर्शन के श्री आत्म प्रकाश मिश्रा और नवभारत टाइम्स के सौरभ श्रीवास्तव उपस्थित रहे और कार्यक्रम की शुरुवात करी | इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हमारे विभाग के आफताब अनवर जी का भी बहुत बड़ा योगदान रहा | मोबिपिक्स कार्यक्रम पिछले तीन सालो से चल रहा है और इसका श्रेय हमारे विभागाध्यक्ष डॉ मुकुल श्रीवास्तव को जाता है जिन्होंने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाते रहने का काम किया है | भाग लेने वाले सभी छात्रों को मुख्य अथितियों द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान किया गया कार्यक्रम के दौरान | कार्यक्रम का संचालन सुरभि यादव जी ने किया और सफलता पूर्वक पिंटू जॉर्डेर जी ने समापन किया | कार्यक्रम की कुछ चित्रों को संगलन कर रहा हूँ | ...
bhai waah......
ReplyDeleteधन्यवाद
ReplyDelete