मेरी माँ
बचपन की कुछ बातें याद हैं मुझे,
याद है मेरी माँ का वो आशाओं से भरा चेहरा
सपनों से भरी वो आँखें
जिससे उन्होंने कितनी उम्मीदों को पाला था
रातों को जाग-जागकर ।
माँ का वो शांत सा चेहरा
याद है मुझे
मेरे लिए देर तक माँ का
खाने पर इंतज़ार करना
और अपने हिस्से की मिठाई मुझे दे देना ।
मेरे लिए मंदिरो में जाकर
देवी - देवताओं से मन्नतें मांगना
लेकिन मेरी माँ
शायद यह नहीं जानती
कि इस युग में जहाँ हर चीज़
दौलत की तराज़ू पर तौली जाती है
बड़े बड़े चढ़ाओ वालो की मन्नतें पूरी होती है
वहां तेरी ये पवित्र मन्नतें
किसी भारी चढ़ावे के नीचे दबकर दम तोड़ देगी।
duniya mein maa se pavitra koi shabd nhi aur maa ki manntein kisi chadhave ki mohtaz nhi maaa ke nikle shabd to upar wala bhi nahi thukra skta kyu maa ka darza teeno jahan se bhi uncha hai....
ReplyDeleteajkl ke yug me aisa hi hota hai bhai saahab...jis prakaar ka system hai usme maa ki duwaaye bacche ko to baccha ke rakhti hai lekin bache ki mehnat ka nateeza ni mil rha hai
Deletebahot khoobsurat likha hai aapne bhai, aankho se aansu aagye maa ki yaad aa gyi
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